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Shanti Sandesh

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जब किसी ब्लोगर का लेख़ अखबारों मैं छपता है.

about 1 month ago
जब किसी ब्लॉगर का लेख़ अखबारों मैं छपता है, तो वो कितना खुश होता है इसका अंदाज़ा आप ऐसी बहुत सी पोस्ट को पढ़ कर लगा सकते हैं जहाँ ब्लॉगर ने अपने लेखों की किसी समाचार पत्र मैं छपने पे ख़ुशी ज़ाहिर की है. कुछ ने तो अपने साइड बार मैं ही अख़बार की कटिंग लगा रखी है जैसे उसका लेख़ ना छपा कोई मेडल मिला है. लेकिन ऐसा क्यों है ? एक समय था जब अंतरजाल पे ब्लोगिंग जैसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी लोगों के पास अपनी लेखन की प्रतिभा को लोगों तक पहुँचाने का केवल एक ही माध्यम हुआ करता था,अखबार. उस समय लोग अख़बारों...

आखिर इन मर्दों को शर्म क्यों नहीं आती?

about 1 month ago
किसी भी समाज मैं यदि आप यह चाहते हैं की असंतुलन ना पैदा हो तो हमेशा काम इन्साफ से लेना चाहिए. आज महिलाओं को ऐसा लगता है की यह पुरुष प्रधान समाज है और हमेशा महिलाओं की आज़ादी छीनने की कोशिश की जाती है. मेरा ख्याल है कि यह पूरा सच नहीं इसलिए कुछ सवालों को यहाँ सामने रख के इस लेख द्वारा सच समझने कि कोशिश कर रहा हूँ. आशा है आप सब भी अपने विचार सामने रखेंगे. मैं इस बात से सहमत हूँ कि इस समाज मैं महिलाओं के साथ बहुत जगहों पे ज्यादती होती है, ज़ुल्म भी होता है और औरत मजबूरी की हालत मैं सब कुछ चुपचाप...

क्या हम सेक्स जनित विसंगतियों पर काबू पा सकते हैं?

about 1 month ago
बलात्कार आज भारत में सबसे ज्वलंत मुद्दा है. बावजूद इसके इस समस्या के तह में जाने का प्रयास बहुत कम किया गया है. समाधान के तौर पे हमेशा कानून व्यवस्था को कोसने और बलात्कारी को सख्त सजा का सुझाव दे के मामला भुला दिया जाता है और नतीजे मैं बलात्कार के मामले बढ़ते जा रहे हैं. आज आवश्यकता है इस समस्या का हल तलाशने की. बलात्कारियों की कई किस्में हुआ करती हैं और उनका फर्क भी हमें मालूम होना चाहिए.इंसान के जीवन मैं रोटी कपडे के बाद सेक्स कि ज़रुरत सबसे अधिक महत्व रखती है. किसी को यह रोटी कपडा,मकान और...

अगले जनम मोहे बिटिया नहीं कीजों

about 1 month ago
औरत माँ है बेटी है पत्नी है पूज्य है, जहां पर नारी का सम्मान होता है वहां देवता निवास करते हैं " यत्र नारी पूज्यंते, रमंते तत्र देवता "लेकिन इन सबका क्या अर्थ हुआ यदि किसी समाज में महिलाओं को उनके जीवन की सही आज़ादी से वंचित किया जा रहा हो? नारी और पुरूष में प्राकृतिक भिन्नताएं हैं इसी कारण से नारी पुरुष सामान नहीं लेकिन बराबरी का दर्जा मिलना ही चाहिए और कहीं कहीं तो नारी को पुरुष से भी ऊंचा स्थान देना चाहिए. धार्मिक किताबों मैं भी बहुत सी जगहों पे नारी को पुरुष से ऊंचा स्थान दिया गया है. यदि...